मैं ऐसे कई लोगों से मिला हूँ जो अपने आपको आध्यात्मिक और अपने जीवन को आध्यात्मिक जीवन कहते हैं। इस विषय पर सभी के विचार मेरे जैसे नहीं हो सकते। कई लोग कहते हैं कि उनमें वो सूक्ष्म दृष्टि तो है जो होनी चाहिए पर वो परिवर्तित हो जाती है। इसलिए वो ड्रग्स लेते हैं और इससे उबर पाते हैं। यदि आप कुछ ऐसा सेवन कर रहे हैं जिससे आपकी सचेतनता प्रभावित होती है, वो ड्रग्स ही है।
पूरे विश्व के साथ ये भारत में भी ये हो रहा है। पश्चिमी दुनिया में तो ऐसे कई युवाओं से मैं मिला हूँ जो कहते हैं कि जब वो ड्रग्स लेते हैं और उन्हें आध्यात्मिकता का अनुभव होता है। दरअसल गलत मार्गदर्शन के कारण वो ऐसा कर रहे हैं। उन पलों में वो अपने नियंत्रण में नहीं होते। चूंकि ड्रग्स उन्हें नियंत्रित करती है और ऐसे में आमतौर पर ये लोग अपनी उर्जा से आकर्षित होते हैं। उनमें आध्यात्मिक रुचि तो है पर उन्होंने सही रास्ता नहीं अपनाया है।
कई बार मैं ऐसे लोगों की कोई सहायता नहीं कर पाता। मैं चाहता तो हूँ पर वो लत छोड़ने का निर्णय नहीं कर पाते। कुछ में इच्छाशक्ति की कमी है तो कुछ सोचते हैं कि ड्रग्स लेने के बाद उनकी उर्जा बढ़ जाती है। जब उन्हें लगता है कि मैं उनकी बात को सराह नहीं रहा हूँ तो वो मुझसे दूर हो जाते हैं। मैंने युवाओं को शराब, सिगरेट या ड्रग्स के इतर एक उपाय बताया जो न तो उनके मस्तिष्क को नुकसान पहुँचाता है न ही उर्जा को, उसका नाम है प्रेम। प्रेम आपको परमानन्द देगा और किसी ड्रग्स की तुलना में इससे आप खुश भी रहेंगे। मुझे लगता है अगर आपके पास प्रेम है तो आपको किसी ड्रग्स की आवश्यकता नहीं। आपको अपनी सचेतनता को बदलने की आवश्यकता नहीं है। प्रेम अपने आप में परिपूर्ण है।
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