मैंने एक शोध पढ़ा जिसमें ड्रग्स की एक-दूसरे से तुलना की गई थी। वैज्ञानिकों ने कानूनी और गैर-कानूनी ड्रग्स के प्रभावों की जांच की थी। ड्रग्स लेने वाले व्यक्ति और उसके आस-पास होने वाले दुष्परिणामों को भी इसमें शामिल किया गया था। नशे का आदी व्यक्ति ध्यान की कमी, आर्थिक क्षति और सामाजिक परेशानियों से घिरा रहता है। जबकि उससे जुड़े लोग स्वास्थ्य, आर्थिक और वातावरण संबंधी समस्याओं से जूझते है।
इस शोध की खास बात यह है कि, शराब, जो सबसे हानिकारक बताई गयी है उसे कानूनी मान्यता मिली हुई है। हानिकारक नशे के दर्जे में, शराब को प्रथम स्थान, कोकीन को दूसरा व हिरोईन को तीसरा स्थान मिला है। तंबाकू भी कोकीन जितना ही हानिकारक है। हानिकारक मादक पदार्थ में प्रथम स्थान पर आई शराब ही सबसे ज्यादा खतरनाक है। इसका सेवन अकाल मृत्यु और विकलांगता की वजह है। इसके सेवन से आप हिंसक और अवसादग्रस्त होकर न सिर्फ स्वयं को बल्कि दूसरों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
बावजूद इसके शराब खुले बाजारों में मिलती है और ये कानूनी ड्रग है। कई देशों में तो बच्चों को भी इसके सेवन की अनुमति मिली हुई है। यही नहीं इससे सेवन को बढ़ावा दिया जाता है। सरकार कोकीन, हिरोईन, भांग और अन्य ड्रग्स की तरह इस पर भी बैन क्यों नहीं लगाती? ये मत समझिएगा कि मैं गांजा या अन्य गैर-कानूनी ड्रग्स को मान्यता दिलाने के पक्ष में हूँ। मैं बस इतना चाहता हूँ कि शराब को गैर-कानूनी घोषित किया जाए। कम मे कम सरकार को इसे बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
आपको क्या लगता है कि सरकार को इस शोध के विषय में जानकारी नहीं होगी? उन्हें सब मालूम है। इसके बाद भी सरकार इसे गैर-कानूनी नहीं कहती और न ही इस पर बैन लगाती है। दरअसल, सरकार करों के रूप में शराब और तबाकू से बहुत धनराशि प्राप्त करती है। ऐसे में इस पर बैन लगाने का मतलब होगा धन के एक बड़े स्रोत को खो देना। सरकार को तो अपने देश के लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए न कि उन्हें बीमार करना चाहिए। हमें अपने शरीर की जिम्मेदारी स्वयं ही लेनी है।
शराब का सेवन मत कीजिए, धुम्रपान या किसी भी अन्य ड्रग से दूर रहिए। आपको ये महसूस होगा कि इसका सेवन न करना आपके शरीर, मन और आत्मा के लिए सबसे अच्छा है।
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