शराब की लत – किसी भी व्यसन को अपने जीवन की कमान मत सौंपिए – 12 दिसंबर 08

एक बार एक योग टीचर चिकित्सा सत्र में आई। उसने बताया कि वो हर रोज शराब पीती है। जब उसने योग टीचर बनने का प्रशिक्षण लिया तब जरूर शराब का सेवन कुछ कम कर दिया था। उसने कहा कि, "कुछ समय पहले मैंने शराब पीना छोड़ दिया था, पर अब दोस्तों के साथ बाहर जाती हूँ तो शराब का सेवन कर लेती हूँ" । उसने बताया कि जब वो पीना शुरू करती है तो ये नहीं सोचती कि कितनी मात्रा में शराब पी लेती है। इस तरह महीने में एक या दो बार वो शराब का सेवन करती थी।

वो मुझसे कहने लगी कि, "मैं नहीं जानती कि योग मुझे शराब पीने की अनुमति देता है या नहीं। मुझे स्वयं महसूस होता है कि शराब मेरे लिए अच्छी नहीं है। लेकिन उस समय मैं सब भूल जाती हूँ और पीने लगती हूँ"। बस मुझे नियमों की बेड़ियों में जकड़े जाना बिल्कुल पसंद नहीं है। मैंने उससे पूछा कि, "फिर आप शराब के नियंत्रण में क्यों रहना चाहती हैं? न मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ न ही योग टीचर, अगर वाकई कोई आपकी सहायता कर सकता है तो वो स्वयं आप हैं"।

मैंने उससे कहा कि नियमों की बेड़िया तो मुझे भी पसंद नहीं है। न मैं किसी पर नियम थोपता हूँ न स्वयं नियमों में जकड़े जाना चाहता हूँ। मुझे समझ नहीं आता कि लोग दूसरों पर नियंत्रण क्यों रखना चाहते हैं। वहीं दूसरे लोग नियंत्रण में रहकर कैसे अच्छा महसूस करते हैं? यकीनन वह महिला शराब के नियंत्रण में थी। उसने कहा कि वो इसकी आदी नहीं है। अकेले में वो शराब को हाथ तक नहीं लगाती। लेकिन अपने दोस्तों के साथ बाहर जाने पर ही वो अपना नियंत्रण खो देती है। इसका अर्थ ये हुआ कि ये इच्छा उसके अंदर से नहीं बल्कि बाहर से आती थी। जो काम आप करना नहीं चाहती हैं उसे बाहरी दबाव में कर रही हैं। आखिर बाहरी चीजें आपको क्यों नियंत्रित कर रही हैं?

शराब पीने का फैसला आपका नहीं है। आप शराब पीकर अच्छा महसूस नहीं करती फिर भी आप पीती हैं। इससे उबरने के लिए आपको इच्छा शक्ति और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता है। जब आप इसे अपनाना शुरू करेगी शराब का सेवन नहीं करेगी। मुझे पूरा भरोसा है। अगर आपके मन में शराब और धुम्रपान को छोड़ने की इच्छा शक्ति है तो आप उसे छोड़ सकते हैं।

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